• सफर

    आओ चलें हम कोई सफर तय करे मीलों तक लंबी दूरी जो चल सकें जहाँ ना खुले इतिहास के पन्नों की किताब कोई कुछ तुम अपना कुछ हम अपना बस हाल बयाँ कर सके बातें नजरों से हो जहाँ मगर गहराई तक हम उतर सकें कुछ तेरे राज कुछ मेरे राज बस कह सके दर्द…

  • Gender sensitization

    Few months ago I attended a workshop on Gender sensitization. Whatever I figured out was that it technically refers to the process where the people of all genders are taught to respect everyone while acknowledging the differences. While in our daily life too we have heard statements like Boys shouldn’t cry …I mean why ??…

  • 🍃🍃

    बेजान मौसम की मार में मैं खिला हुआ,हा अपने ही अस्तित्व को बचाने मैं खङा हुआ ।

  • यादें!

    दर्द भी कितना सुकून देती है तुम बयाँ कर गये सजदे हमसे किए और वादे उनके निभाते चले गए बारिश की बेरूखियत पर अक्सर दिल मुस्कुराता है जाने अनजाने ये बारिश भी तुम्हारी याद दिलाता है और जब मिलते हो तो कहते, हाय याद तुम्हारी आती है बिना कुछ कहे तुम्हारी निगाहें अब हमें डराती…

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    जब सितारे गर्दिश में हो तो ये मंजर कैसा तब कस्ती भी हमसे और तूफान भी हमारा ।।

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    “हमारी मुहब्बत में ना तो सुरुर था ना शबाब वो अपने ख्वाबों की मल्लिका और हम अपने जहाँ के नवाब “

  • ……

    “मनाना तो हमने भी चाहा मगर दिल को आदत नहीं थी जिंदगी की धूप में छांव ढूंढने की बस चाहत नहीं थी “

  • रास्ते

    जिंदगी से तेरी ठन चुकी है उम्मीदों के तिनको पर अब भी तु खङी है है हौसले बुलंद तेरे,रास्ते हो चाहे कितने भी अंधेरे मंजिलों को मुकम्मल करने का हौंसला आफजाया है फिर भी ना जाने क्यों आज जी जरा घबराया है एक नयी मंजिल एक नया रास्ता जो आया है ।।

  • Think!

    Class is the new caste!

  • असंतोष

    टिमटिमाते तारों के बीच अकेला बैठा था, लेकर उपवन की आंधी दिल में समेटा था क्या खोया क्या पाया यह सोचने का समय अब निकल चुका था, अपने आए अश्रु लेकर ,,हाय मैं उन्हे अपने सपने भी ना कह सका था मेरी धङकनो की आहट अब आहिस्ता हो चली थी जी भर के मैं न…

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